4:- उपनयन संस्कार का मुहूर्त, मुंडन संस्कार( चूड़ाकर्म्)
5:- वास्तु शास्त्र :-
१ भूमि चयन
२:- वास्तु शास्त्र के अनुसार भवन का नक्शा
३ :- आपके date of birth के अनुसार पांच तत्व को अपने भवन मे संतुलित करना
४:- भूमि पूजन बैदिक मंत्रो विधि से सम्पूर्ण करना
५:- ,गृह प्रवेश का मुहूर्त, व गृह प्रवेश का पूजन सम्पूर्ण विधि सम्पन करवाना
६ :- रंगो (प्रकाश) जो मानव को कैसे प्रभावित करता उसका सही चयन करना
७:- वास्तु शास्त्र के अनुसार् 16 दिशायो का मानव जीवन मे क्या महत्वपूर्ण भूमिका प्राप्त होता है
6:- आपके नाम व date of birth आपको अच्छा जॉब के लिये सही दिशा व शहर का चयन करना
7:- आपके कार्य के अनुसार आपके आफिस का वास्तु आपके date of birth के अनुसार संतुलित करना
8:- ( प्रसन कुंडली के माध्यम से) चोरी व खोये हुये मानव व वस्तु का दिशा ज्ञान करना मिनला व न मिलना का फैसला करना
9:- वास्तु शास्त्र के अनुसार मंदिर निर्माण के लिये उचित ब्रह्मण भूमि का चयन मंदिर मे किस देव को किस् दिशा मे रखा जाता वास्तु शास्त्र के अनुसार उचित स्थान् का चयन
10:- वास्तु शास्त्र:- के अनुसार कम्पनी फैटरी ,सिटी मोल को रोड केअनुसर् भूमि चयन वास्तु अनुसार नक्शा प्राप्त करे
11:- कुंडली मे बनने वाले दोष : पाप कतरी योग, विषयोग्,अंगारक योगा, शनि शांति ,राहु शांति ,पितृऋण, गुरु चांडाल योगा के शांति के लिये बैदिक मंत्रो के द्वारा विद्वान ब्राह्मणो से सम्पूर्ण विधि से पूजा संपन्न करवाय जाता है
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